किसान भाई खेत की मिट्टी व पानी की जांच कैसे करवाए ? पुरी जानकारी हिन्दी में..

लगातार सघन खेती कार्बनिक अंश की कमी के कारण मिट्टी की उपजाऊ  शक्ति कमजोर हो रही है। मिट्टी में बहुपोषक तत्वों की कमी, सूक्ष्म तत्वों की कमी, जलधारण क्षमता में कमी आदि के कारण उचित प्रबंध जरूरी है। किसान अपने खेतों से मिट्टी और पानी के नमूने लेकर मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में मिट्टी-पानी की जांच करवायें। इससे फसल के लिए संतुलित खाद/उर्वरक की मात्रा की पता चलेगा, साथ ही पैसों की भी बचत होगी एवं मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।


खेत की मिट्टी की जांच करवाने के फायदे:-

  • प्रति ईकाई क्षेत्र से कम लागत में कृषि उत्पादन बढ़ाना।
  • संतुलित खाद एवं उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना।
  • मिट्टी में मुख्य एवं सुक्ष्म पोशक तत्वों की उपलब्ध मात्रा के अनुसार फसल की पोषक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु संतुलित उर्वरक सिफारिश देना।
  • लवणीय व क्षारीय समस्याग्रस्त क्षेत्रों की पहचान कर भूमि सुधार हेतु सिफारिश कर उत्पादन बढ़ाना।
  • फसलों एवं फल वृृक्षों के चयन में सुविधा।

खेत की मिट्टी की जांच कब करवाएः-

फसल बुवाई से एक-डेढ़ माह पहले मिट्टी कर जांच करवाए ताकि बुवाई से पहले ही परिणाम प्राप्त हो जाए या फसल की कटाई हो जाने अथवा पकी हुई खड़ी फसल में जब भूमि में नमी की मात्रा कम से कम हो, जांच करवाने का उपयुक्त समय होता है। इसके साथ-साथ यदि खेत की उत्पादकता कम हो रही है या फसल चक्र बदल रहे है, तब भी मिट्टी की जांच करवाई जानी चाहिए।

किसान भाई मिट्टी स्वास्थय की जांच हेतु नमूनें कैसे लें ?

  • खेत में मिट्टी की उपरी सतह साफ कर यादृच्छिक (रेण्डम) आधार पर 8-10 स्थानों का चयन कर 15 से गहरा "V" आकार का गड्ढ़ा खोदकर मिट्टी एकत्रित करें।
  • एकत्रित की गई मिट्टी को एकत्रित कर हाथ से अच्छी तरह से मिलाकर ढ़ेर बना लेवें।
  • एकत्रित की गई मिट्टी को थोड़ा फैलाकर आड़ी व खड़ी लाईन डालकर चार भाग कर लेवें व आमने सामने के दो भागों को अलग कर देवें एवं शेष  बचे दो भागों को फिर से अच्छी तरह से मिलाए।
  • पुनः ढ़ेर बनाकर चार भाग करके उक्त प्रक्रियो का बार-बार दोहराते रहें जब तक मिट्टी करीब 500 ग्राम तक रह जाएं।
  • इस मिट्टी को साफ कपड़े की थैली में भरें, तथा थैली पर किसान का नाम, पता, खेत की पहचान/खसरा नम्बर व बोई जाने वाली फसल (सिंचित/असिंचित) आदि का विवरण लिखकर एक लेबल थैली की अन्दर व एक थैली के बाहर बांध देवें।

ऊसर भूमि में मिट्टी का नमूना लेने की विधि -

  • ऊसर भूमि में मिट्टी का नमूना गहराई तक लेना चाहिए। नमूने की गहराई उपर से 15 सेमी. 15-30 सेमी. 30-60 सेमी. और 60-100 सेमी. की चार सतहोें का लेना चाहिए।
  • ऊसर भूमि में बरमा से 100 सेमी. का गड्ढ़ा खोदकर नमूना लिया जा सकता है। गड्ढ़े का नमूना इस प्रकार लेना चाहिए-
  • गड्ढ़े की एक तरफ की दिवार सीधी कर लें, उपर से 15,30 और 60 सेमी. गहराई तक निशान लगाए।
  • सीधी दिवार से 15 सेमी. तक कस्सी से मिट्टी बाहर निकाल लेें, कस्सी की मिट्टी हटाकर बीच का हिस्सा साफ कपड़े में रखे।
  • इसी तरह 15-30, 30-60 और 60-100 सेमी. की गहराई का नमूना लेवें। नमूने की मात्रा प्रत्येक गहराई से करीब आधा किलोग्राम होनी आवश्यक है।

बाग लगाने के लिए मिटटी का नमूना लेने की विधि -

  • फल के पेड़ों की वृद्वि के लिए मृदा का पोशण स्तर एवं अन्य परिस्थितियां महत्वपूर्ण है। बागान लगाने वाली भूमि की 2 मीटर गहराई तक का नमूना लेना चाहिए।
  • उसर भूमि में नमूने लेनें की विधि से नमूना लेवें। नमूना बरमा अथवा 2 मीटर गहरा खड्ढ़ा खोदकर लेवें।
  • निम्ननिखित सतहों से अलग-अलग नमूना लेवें -
उपरी सतह से 30 सेमी. तक।
30 से 60 सेमी. तक।
60 से 100 सेमी. तक।
100 से 150 सेमी तक।
150 से 200 सेमी तक की सतह।

किसान भाई जांच हेतु कैसे लें पानी का नमूना ?

सिचाई पानी हेतु पानी का नमूना लेने के लिए यदि नलकूप है तो पम्प को 8-10 मिनट चलानें के बाद व यदि खुला कुआ है तो बाल्टी से पानी निकालते समय उसे 8-10 बार डुबो लें तथा पानी के नमूने को एक साफ बोतल में नलकूप/कुएं के पानी से अच्छी तरह धोकर पूरा भर लेवें और बोतल के उपर कृशक का नाम, सम्पूर्ण पता लिखकर प्रयोगशाला में जांच हेतु भिजवाएं।

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