प्रेम एक ऐसी चीज है जो हारे हुए व्यक्ति को भी जीता देती है। लेकिन घृणा एक पूरी तरह से सफ़ल हुए व्यक्ति को भी नीचे गिरा देती है।

पैट्रोल बना शताब्दी - गुरदीप सिंह सोहल


 पैट्रोल बना शताब्दी।

डीजल भी है तैयार।।

दिनों दिन बढ़ रहा।

जेब से हो रहा पार।।

मांग होवे तो दर बढ़े। 

रोज रोज बढ़े वपार।।

पेट्रोल रोज न मिले।

कैसे चले मेरी कार।।

पुतला फूंके रेट घटे।

तो मै फूकूं हजार।।

बार बार के फूंकते। 

ठीक न होवे बाजार।।

लोक डाउन की कसर।

निकाल रही सरकार।।

बाजार करना ठीक हो।

तो करो सब बहिस्कार।

मांग रहेगी न बिकेगा।

ऐसे ठीक होगा बाजार।

आदत बदल लो अपनी।

जीप कार छोड़ दो यार।

साईकिल पे आ जाओ।

सभी मर्द बनो सरदार।।

मांग न रहेगी जब भी।

चले कैसे सब बाजार।

ग्राहक जब जागेगा।

नीचे होगी सरकार।।

पानी के भाव बिकेगा।

जब होगी न दरकार।।

सोहल की मान लो।

क्यों धरना बार बार।।

गुरदीप सिंह सोहल  Retd AAO PWD  हनुमानगढ़ जंक्शन राजस्थान

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