बाइक स्कूटी मोटरकार, चक्के सबके दो दो चार - गुरदीप सिंह सोहल

 बाइक स्कूटी मोटरकार। 

चक्के सबके दो दो चार।।

जेब लूट ली कोरोना ने।।

खड़े पंक्चर हुए बेकार।।

बार बाजार महंगा हुआ। 

रुपे का घट रहा आकार।

रोज रोज मर मर जीना।

बंदा सहे वक्त की मार।।

डीजल तेल हवा हुआ।

आग लगाए शीत बौछार।।

बिजली झटका क्यूं लगा।

एसी तैसी करे करतार। 

कुकर में प्रैसर बढ़ता जावे।

कैसै चलेगा घर संसार।।

दुर्लभ हुआ अन्न पानी।

चक्की पीस रही सरकार।।

रोजगार के चक्कर में।

रोटी दाल भूला संसार।।

एक दूजे को खींच रहे।

बीच फंसे सब मझधार।।

साफ हवा मिलती नही।

सांस लेना हुआ दुश्वार।।

सोहल भड़ास निकाल ले। 

किसको गाली दे सरदार।।

गुरदीप सिंह सोहल, हनुमानगढ़ जंक्शन, राजस्थान

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