प्रेम एक ऐसी चीज है जो हारे हुए व्यक्ति को भी जीता देती है। लेकिन घृणा एक पूरी तरह से सफ़ल हुए व्यक्ति को भी नीचे गिरा देती है।

बुढ़ापा छोड़ो जवान बनो - गुरदीप सिंह सोहल

 बुढ़ापा छोड़ो जवान बनो।

बुढ़ापा छोड़ो तूफान बनो।  

मुश्किलों के बाण चलाओ।

बुढ़ापा छोड़ो कमान बनो।

सिर झुका के जीना नहीं।

बुढ़ापा छोड़ो सम्मान बनो।

उम्मीदों से तन मन भर लो।

बुढ़ापा छोड़ो समाधान बनो।

समेट लो दुनियां बाहों में।

बुढ़ापा छोड़ो अमान बनो।

पांच दुष्टों की साधना में।

बुढ़ापा छोड़ो महान बनो।

जाने से पूर्व जीना न भूलो।

बुढ़ापा छोड़ो अरमान बनो।

हिम्मत ने बदल दी दुनियां।

बुढ़ापा छोड़ो पहलवान बनो।

कमजोरी से कैसे लड़ना है।

बुढ़ापा छोड़ो घमासान बनो।

सोहल संघर्ष करना चाहिए।

बुढ़ापा छोड़ो पहचान बनो। 

गुरदीप सिंह सोहल  Retd AAO PWD  हनुमानगढ़ जंक्शन (राजस्थान) 70621-16710

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