योग दिवस को समर्पित रचना - गुरदीप सिंह सोहल

स्वस्थ शरीर निरोगी काया।
होती कसरतों की शाम है।
योग भगाए रोग रखे निरोगी।
तन मन रहता नहीं जाम है।
हर बीमारी से जंग करना।
अच्छी सेहत का काम है।
बढ़िया सेहत ऐसे मिलेगी।
सब योगासन के नाम हैं।
पहले जल्दी उठना जाना।
आलस का काम तमाम है।
दौड़ लगाकर भ्रमण करना।
अभ्यास कर लेना आम है।
स्वच्छ वायु में सांस लेना।
मुफ्त मिले देना न दाम है।
योगासन सूर्य नमस्कार कर।
करते रहना ही प्राणायाम है।
शराब पीना करती बर्बाद है।
दूर रहना लेना नहीं जाम है।
घर में खाना बाहर पखाना।
समझ लेना खास पैगाम है।
चबा चबा कर भोजन करना।
पाचन क्रिया से गुलफाम है।
वाहन छोड़ साईकिल लाना।
बचत से बन जाता दाम है।
धूप माटी अग्नि जल पवन।
साफ रखना सबका काम है।
खाली दिमाग शैतान का घर।
यह घर शैतान का न धाम है।
डाक्टर से बचना ही सेहत है।
अच्छी सेहत पे फिदा राम है।
पौध लगा आंगन महकाना।
संतान पेड़ काटना हराम है।
ये तन पांच में मिल जाएगा।
सबको समझ कर सलाम है।
मन को उस रब्ब से जोड़ना।
जुड़े रहना उसी में विश्राम है।
सोहल मशीनरी कम करदे।
कम आराम ज्यादा काम है।
गुरदीप सिंह सोहल  Retd AAO PWD
हनुमानगढ़ जंक्शन  (राजस्थान) 70621-16710

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