बदलती संस्कृति-हंसराज हंस

भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया में जानी व मानी जाती थी। क्योंकि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की रही …

मेरा गांव/ नरेश मेहन

गांव से आए हो बताओ  क्या हाल है  मेरे गांव के  क्या अब भी  वैसा ही है  मेरा गांव ।  पगडंडियां  अब …

कविता - भ्रूण हत्या - नरेश मेहन

कब तक करोगे  भ्रूण हत्या  कब तक मारोगे  मां की  कोख पर लात   कब तक रोकोगे इंसान के जन्म को तुम धरत…

दर्द और बात > जी.एल. चित्रकूटी

दर्द मीठा होता है बात कड़वी होती है कभी कभी बात मीठी होती है  दर्द कड़वा होता है कड़वे दर्द के स…

कविता- एक लड़की >> जी.एल. चित्रकूटी

बड़ी बेरहमी से पीटी जा रही थी  एक लड़की  शिकारी को अत्यंत थका देने के बाद पीटा जाता है जैसे  एक …

कौशल किशोर का कविता पाठ 'यह गम अपना, हम सब का साझा' - शतीन्द्रनाथ चौधुरी

अतुल्य हिन्दी के मंच से कौशल किशोर का काव्यपाठ यू-ट्यूब पर सुना। इसका संजीव प्रसारण इसी मंच से किया…

डर कर मौत को गले लगाना क्यों - गुरदीप सिंह सोहल

डर कर मौत को गले लगाना क्यों।  मर के मसला कभी हल नहीं होता।। जंग जिंदगी का ताउम्र जारी रखना। रब्…

आओ धरती को स्वर्ग बनाए - नरेश मेहन

आओ  धरती पर  स्वर्ग बनाएं  ढूंढ लाए  कहीं से कान्हा सुदामा को  अपना दोस्त बनाएं।  थोड़ी सी ले ले…

Rupee4click : Online Earning Website Review. वेबसाइट समीक्षा

नमस्कार साथियों । आज के इस पोस्ट में हम Rupee4click नाम की एक ऑनलाइन कमाई करने वाली वेबसाइट के बारे…

कवि विजेन्द्र की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा वे जनवादी धारा और अग्रगामी चेतना के कवि थे

कवि  विजेन्द्र की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा  वे जनवादी धारा और अग्रगामी चेतना के कवि थे लखनऊ। जूम…

"औरत" - नरेश मेहन

सच मानिए एक औरत  मेरे भीतर हमेशा से  रहती है।  कभी बहुत प्यारी सी  कभी बहुत क्रूर कभी  कपड़ों से …

पैट्रोल बना शताब्दी - गुरदीप सिंह सोहल

पैट्रोल बना शताब्दी। डीजल भी है तैयार।। दिनों दिन बढ़ रहा। जेब से हो रहा पार।। मांग होवे तो दर बढ़े।…

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